वाराणसी (व्यूरो) - काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर साकेत कुशवाहा को केंद्र सरकार ने अरुणाचल में राजीव गांधी यूनिवर्सिटी का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. कुशवाहा ने नाइजीरिया में जनजाति समुदाय के लोगों के बीच लंबे समय तक काम किया है। इनकी नियुक्ति पांच साल के लिए की गई है। कुलपति के रूप में यह दूसरी बार इनकी नियुक्ति हुई है। इससे पहले वह बिहार में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में कुलपति रहे।
प्रो.साकेत कुशवाहा की गिनती दुनिया के जाने-माने कृषि अर्थशास्त्रियों के रूप में होती है। एक अक्टूबर 1999 में ये नाइजीरिया में प्रोफेसर रहे। 13 सालों के कार्यकाल में उन्होंने जनजाति समुदाय के उत्थान में अपना योगदान दिया। छह सालों तक वहां डीन आफ मैनेजमेंट रहे। इसके अलावा सात साल तक कृषि अर्थशास्त्र एवं प्रसार विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में काम किया। प्रोफेसर पद पर रहते हुए उन्होंने नाइजीरिया में जनजातियों के उत्थान में कई ऐसे कार्य किए जिससे उन्हें दुनिया भर में शोहरत मिली और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने अर्थशास्त्री के रूप में गिना जाने लगा।
प्रो.कुशवाहा साल 2006 में बीएचयू में प्रोफेसर बने। साल 2007 से 2010 तक वह बीएचयू में कृषि अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे। साल 2008 से 2011 तक बीएचयू के एग्री बिजनेस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर रहे। बाद में फरवरी 2014 में उन्हें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, बिहार में कुलपति का पद सौंपा गया। मिथिला विश्वविद्यालय में उन्होंने शैक्षणिक विकास के लिए कई अनूठे कार्य किए, जो मील के पत्थर साबित हुए। बेहतरीन कार्यपद्धति को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रो.साकेत कुशवाहा को अरुणाचल में केंद्रीय विश्वविद्यालय की कमान सौंपी है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. साकेत कुशवाहा दो अगस्त 2017 से दो अगस्त 2018 तक बीएचयू के दक्षिणी परिसर में प्रोफेसर इंचार्ज रूप में नियुक्त रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इनके करीब सौ शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही 15 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के अवार्ड से भी इन्हें नवाजा जा चुका है।
रिपोर्ट - वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला हाशमी

